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गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन भी हो सकता हैडरावना सपना देखना कोई बीमारी नहीं है, लेकिन जब यह बार-बार हो, दिनभर काम करने की क्षमता कम करे, दिमाग में उसकी यादें बनी रहें या व्यक्ति सोने से ही डरने लगे, तब इसे नाइटमेयर डिसऑर्डर माना जाता है. ऐसे लोगों में अक्सर थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, याददाश्त में कमी और बुरे सपनों का लगातार डर देखने को मिलता है. बच्चों में यह समस्या होने पर माता-पिता की नींद भी प्रभावित होती है.
ये सपने आते तो हैं लेकिन क्या आपने सोचा है कि इन बुरे सपनों का मतलब क्या होता है.
अगर आपकी भी डरावने सपने आने की वजह से दिनभर की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो यह समय उन्हें कुछ घरेलू उपाय आजमाकर कंट्रोल करने का है। आइए जानते हैं कैसे।
व्यक्ति जब देर से भोजन करता है तो उससे उसकी नींद का चक्र बाधित होता है क्योंकि उस समय शरीर भोजन को पचाने का काम भी कर रहा होता है। जब नींद का चक्र बाधित होता है, तो व्यक्ति को डरावने सपने आने लगते हैं। इस समस्या से बचने के लिए जल्दी और कम मात्रा में भोजन करें।
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हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं: अपनी दिनचर्या में अच्छे आहार और व्यायाम को शामिल करें। इससे आपके दिल और मानसिक स्थिति दोनों को फायदा होगा।
सावधान! क्या आपको भी आते हैं ये बुरे सपने? जान लीजिए मतलब
रेगुलर एक्सरसाइज करें: शरीर को एक्टिव रखने के लिए नियमित व्यायाम करें, जिससे दिल की धड़कन सामान्य बनी रहती है और मानसिक स्थिति भी बेहतर होती है।
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नींद की कमी बुरे सपनों का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। जब हमें पूरी नींद नहीं मिलती, तो दिमाग का आराम ठीक से नहीं हो पाता और वह लगातार सक्रिय रहता है। इस कारण से हम सोते समय कई तरह के विचारों का सामना करते हैं, जो बाद में बुरे सपनों के रूप में हमारे सामने आते हैं। अगर हमारी नींद पूरी नहीं होती, तो दिमाग के click here अवचेतन हिस्से में उठती उथल-पुथल बुरे सपनों का कारण बन सकती है। इससे हमें रात में बार-बार डरावने सपने आते हैं, जिससे हमारा मन बेचैन और परेशान हो जाता है।
सपनो का आपकी नींद पर नकारात्मक असर पड़ता है, यही नहीं यह आपके मानसिक तनाव को भी बढ़ा सकता है। चित्र : अडॉबीस्टॉक
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थेरेपी या काउंसलिंग से मदद मिल सकती है।